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चमोली।दशोली की ग्राम सैंजी ब्यारा की नंदा को बालपाटा बुग्याल में नंदा सप्तमी के अवसर पर जागरो और लोकगीतों के द्वारा कैलाश को विदा किया गया।
माँ नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा का नंदा सप्तमी के अवसर पर नंदा को कैलाश विदा करनें के साथ ही समापन हो गया। अब ठीक एक साल के उपरांत ही नंदा के लोक के इस लोकोत्सव का आयोजन होगा। नंदा सप्तमी के अवसर पर हिमालय में स्थित उच्च बुग्यालो में मां नंदा की वार्षिक लोकजात यात्रा पर विराम लगा

और डोलीयां अपने अपने गंतव्य के साथ वापस लौट गयी।सूर्य भगवान की किरणों और बादलों की लुकाछुपी के बीच सुनहरे मौसम में शुक्रवार सैंजी की डोली हडुंग से चल कर बाल पाटा और दशोली कुरूड की नंदा डोली रामणी गांव से बालपाटा और बंड की नंदा नरेला बुग्याल पहुंची जहां श्रद्धालुओं नें मां नंदा की पूजा अर्चना कर उन्हें समौण भेंट की और माँ नंदा को जागरों के माध्यम से कैलाश की ओर विदा किया गया। इस दौरान पूरा हिमालय मां नंदा के जयकारे से गुंजयमान हो गया।

वही आदित्य मंदिर के अध्यक्ष गुड्डू सिंह बिष्ट ने बताया कि शुक्रवार को नंदा की डोली का रात्रि विश्राम हडुंग और शनिवार को थोली रात्रि विश्राम और रविवार को ब्यारा से बरगड होते हुए रात्रि विश्राम सैंजी अंतिम पड़ाव होगा।और रविवार रात्रि को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन भी होगा और सोमवार दिन में स्यालपाती का आयोजन होगा। इस अवसर पर सैंजी की नंदा की डोली के साथ भूम्याल के पुजारी रणजीत सिंह,भगवती मंदिर के पुजारी धर्म सिंह, भगवती मंदिर के पसवा बलबीर सिंह नेगी,सोहन सिंह फरस्वान,कर्ण सिंह बिष्ट, सहित अन्य श्रद्धालु पहुंचे थे।