डेढ़ लाख श्रद्धालुओं की आस्था से गूंजा हिमालय, 280 किमी की नंदा बड़ी जात संपन्न
देहरादून। आस्था, परंपरा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत का विराट उत्सव बनी श्री नंदा देवी बड़ी जात 2026 23 सितंबर को भव्य एवं निर्विघ्न रूप से संपन्न हो गई। सिद्धपीठ कुरुड़ से 5 सितंबर को शुरू हुई करीब 280 किलोमीटर लंबी पैदल धार्मिक यात्रा में देश-विदेश से 1.50 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। यात्रा के सबसे कठिन पड़ाव होमकुंड तक पहुंचने वालों की संख्या 25 हजार से अधिक रही। खास बात यह रही कि 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों ने भी कठिन हिमालयी मार्ग की चुनौतियों को पार कर मां नंदा के प्रति अपनी अटूट आस्था दिखाई।
यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग और पहाड़ की जीवंत परंपरा का उदाहरण भी बनी। दुर्गम रास्तों और पुलों की मरम्मत व आवश्यक निर्माण स्थानीय संसाधनों से किया गया। रूपकुंड-ज्यूंरा गली के कठिन हिस्से में प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित पार कराया। निर्जन पड़ावों और बेदनी बुग्याल में स्वामी विवेकानंद चिकित्सा हेल्थ मिशन तथा आयोजन समिति ने निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण और दवाइयों की सुविधा उपलब्ध कराई।
पूरे यात्रा मार्ग में नंदनगर व्यापार मंडल, ग्रामीणों और प्रबुद्धजनों ने अपने संसाधनों से भंडारे और श्रद्धालुओं के ठहरने-भोजन की व्यवस्था संभाली। युवाओं, यूट्यूबर्स, ब्लॉगर्स और मीडिया ने भी यात्रा की धार्मिक और सांस्कृतिक छवि को देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सिद्धपीठ कुरुड़ से निकली यात्रा में नंदादेवी कुरुड़ दसोली, नंदादेवी कुरुड़ बणड और ज्वाला देवी ल्वाणी की डोलियों के साथ फरस्वाण-फाट के जाख देवता, करीब 40 भूम्याल की छतोलियां, तीन चौसिंग्या खाडू, गाड़ूघड़ा के पशवा, लाटू के निशान-पशवा और सैंजी से आदित्य भगवान के निशान शामिल रहे। गढ़वाल-कुमाऊं के साथ विदेशी श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस धार्मिक यात्रा को व्यापक सांस्कृतिक स्वरूप दिया।
चंद वंशज राजा करन चंद राज सिंह उर्फ केसी सिंह बाबा और युवराज नरेंद्र चंद राज सिंह के निर्देश पर कुमाऊं से शिष्टमंडल ने भी यात्रा में सहभागिता की। मंदिर समिति अल्मोड़ा के अध्यक्ष मनोज वर्मा ने कहा कि मां नंदा केवल कुमाऊं की आराध्य देवी नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान हैं। कुमाऊं की सहभागिता से दोनों मंडलों की सांस्कृतिक विरासत और भाईचारे को मजबूती मिली
बड़ी जात के संपन्न होने के साथ ही अगली यात्राओं की समय-सारणी भी सामने आ गई है। 11 से 20 अक्टूबर 2026 तक सिद्धपीठ नंदाधाम कुरुड़ में शारदीय नवरात्रि पूजन होगा। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर महाप्रसाद और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
इसके बाद 2027 में वार्षिक लोकजात, 2032 में सप्तकुंड अर्धजात और परंपरा के अनुसार 2038 में अगली श्री नंदा देवी बड़ी जात आयोजित होगी। इस अवसर पर अध्यक्ष हरेंद्र रावत,भागवत बिष्ट,सुखबीर रोतेला, अशोक गौड़ आदि लोग मौजूद थे।


