चमोली। मानसून की आहट के साथ ही पहाड़ों में जनजीवन और यातायात को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी हैं। निजमुला-विरही मोटर मार्ग पर स्थित ‘काली चट्टान’ एक बार फिर क्षेत्रीय जनता और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। यदि समय रहते इस डेंजर जोन का स्थाई उपचार नहीं किया गया, तो आगामी बरसात में यह मार्ग स्थानीय ग्रामीणों के लिए ‘नासूर’ साबित हो सकता है।
बीते वर्ष के जख्म अभी भरे नहीं हैं। पिछली बरसात के दौरान काली चट्टान से हुए भारी भूस्खलन के कारण यह महत्वपूर्ण सड़क मार्ग लगातार 10 दिनों तक पूरी तरह बंद रहा था। मार्ग बंद होने से दर्जनों गांवों का संपर्क मुख्य बाजार और जिला मुख्यालय से कट गया था, जिससे आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति ठप हो गई थी और मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
निजमुला घाटी को जोड़ने वाला यह एकमात्र मुख्य मार्ग है। इस मार्ग के अवरुद्ध होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और दैनिक रसद की आपूर्ति सीधे तौर पर प्रभावित होती है। भूवैज्ञानिक दृष्टि से भी यह हिस्सा बेहद संवेदनशील माना जा रहा है।
वर्तमान में इस संवेदनशील पहाड़ी से रुक रुक कर पत्थर गिर रहे हैं, जो आने वाले बड़े खतरे का संकेत हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग केवल खानापूर्ति के नाम पर मलबा हटाने का काम करते हैं, जबकि इस चट्टान को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने की सख्त आवश्यकता है।


