विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का किया पुरजोर समर्थन; विपक्ष पर साधा निशाना
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विधानसभा के विशेष सत्र ‘नारी सम्मान-लोकतंत्र में अधिकार’ को संबोधित करते हुए महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर विपक्षी दलों के रुख की कड़े शब्दों में आलोचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के प्रयासों में किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने सदन में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को यथाशीघ्र लागू करने के समर्थन में सर्वसम्मत संकल्प का प्रस्ताव भी रखा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की विभूतियों—गौरा देवी, टिंचरी माई, बिशनी देवी शाह और बेलमती चौहान जैसी महान महिलाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति में नारी को शक्ति का प्रतीक माना गया है। आज महिलाएं केवल सहभागिता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चंद्रयान-3 मिशन से लेकर खेल के मैदान और सेना की अग्रिम पंक्तियों तक नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के पारित न हो पाने पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा”जब लोकसभा में संख्या बल के कारण बिल पारित नहीं हो पाया, तो विपक्षी नेता तालियाँ बजा रहे थे। वह दृश्य महाभारत की उस सभा की याद दिलाता है जहाँ द्रौपदी का अपमान हुआ था।
उन्होंने विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि गृहमंत्री अमित शाह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि परिसीमन से किसी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि यदि यह बिल पास होता, तो उत्तराखंड में विधानसभा की सीटें बढ़कर 105 हो सकती थीं, जिनमें से 35 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होतीं।
केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में महिला कल्याण के बजट में पाँच गुना वृद्धि हुई है।


