डीआईटी विश्वविद्यालय में विश्व एनेस्थीसिया दिवस पर आयोजित हुआ जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञों ने बताई आधुनिक चिकित्सा में इसकी उपयोगिता
देहरादून। विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर डीआईटी विश्वविद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में एनेस्थीसिया की भूमिका, सुरक्षित शल्य चिकित्सा और मरीजों को पीड़ामुक्त उपचार उपलब्ध कराने में इसके महत्व पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने एनेस्थीसिया को लेकर आमजन में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय रेडक्रास सोसायटी के राज्य कोषाध्यक्ष मोहन सिंह खत्री ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में एनेस्थीसिया का महत्वपूर्ण स्थान है। जटिल शल्य चिकित्सा को सुरक्षित, प्रभावी और पीड़ारहित बनाने में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की भूमिका अहम होती है। उन्होंने कहा कि एनेस्थीसिया तकनीक में हुए विकास ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है और गंभीर ऑपरेशन को अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
खत्री ने बताया कि विश्व एनेस्थीसिया दिवस वर्ष 1846 में पहली बार सार्वजनिक रूप से ईथर एनेस्थीसिया के सफल प्रदर्शन की ऐतिहासिक उपलब्धि की स्मृति में मनाया जाता है। इस उपलब्धि ने शल्य चिकित्सा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव की नींव रखी।
विश्वविद्यालय के उपकुलपति डॉ. विनय शर्मा ने एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका कार्य केवल ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करना नहीं है, बल्कि शल्य चिकित्सा से पहले मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करना, ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण शारीरिक क्रियाओं की निगरानी करना और ऑपरेशन के बाद सुरक्षित रिकवरी सुनिश्चित करना भी है। गहन चिकित्सा इकाइयों, आपातकालीन सेवाओं और दर्द प्रबंधन में भी इन विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।
प्रशिक्षक आशीष कुमार ने कहा कि आधुनिक तकनीकों, अत्याधुनिक उपकरणों और चिकित्सकों की दक्षता से जटिल ऑपरेशन पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित तरीके से किए जा रहे हैं। उन्होंने एनेस्थीसिया को लेकर लोगों में व्याप्त भ्रांतियों को दूर करने के लिए व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम में चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान, तकनीकी नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्वास्थ्यकर्मियों का निरंतर प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों का उपयोग मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायक है। उन्होंने एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि मरीजों को सुरक्षित एवं पीड़ामुक्त उपचार उपलब्ध कराने में उनका योगदान महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य प्रो. बरखा खुराना, प्रशान्त मौर्य, अनुष्का शर्मा, सुजाता बिष्ट, कुनाल बिजलवाण, साक्षी, जागृति, नंदिता, साधना और मेघा सहित छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रशान्त मौर्य ने किया।


