चमोली।उर्गम घाटी रविवार को एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण की साक्षी बनी मां कालिंका,उर्गम घाटी के भर्की, भेटा, पिलखी और ग्वाणा की आराध्य माँ कालिंका की ऐतिहासिक ‘देवरा रथ यात्रा’ नौ महीनों के विजय भ्रमण के साथ समापन हो गया।
35 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद, पिछले वर्ष 10 जुलाई को शुरू हुई यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आस्था की एक कठिन परीक्षा थी। माँ कालिंका ने जोशीमठ और दशोली ब्लॉक के 98 गाँवों में लगभग 1000 किलोमीटर की पैदल दूरी तय की। इन 181 दिनों की पदयात्रा में माता ने हर घर की ‘ध्याणियों’ को उनके मायके की याद दिलाई और अपना आशीष दिया।
9 फरवरी से भर्की गाँव में उत्सव का जो सिलसिला शुरू हुआ था, वह आज अपने चरम पर पहुँचा। शनिवार को माँ ने अपनी ध्याणियों को ‘ध्याणी भत्ता’ दिया, जिसे पाकर गाँव की हर बेटी भावुक हो उठी। आज विदाई के इस मेले में हजारों की भीड़ ने माँ के जयकारों से पूरी घाटी को गुंजायमान कर दिया।
कल 23 फरवरी को माँ कालिंका की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान और विशेष पूजा-अर्चना के साथ उनके मूल स्थान (गर्भ गृह) में स्थापित किया जाएगा।

