गोविन्दघाट।सिक्ख परंपरा के प्रतीक पावन पंच प्यारों की अगुवाई, निशान साहिब के प्रति अगाध श्रद्धा और पारंपरिक बैंड-बाजों की मधुर धुनों के बीच शुक्रवार को सिक्ख श्रद्धालुओं का पहला जत्था मुख्य पड़ाव गुरुद्वारा गोविन्दघाट से पवित्र हेमकुंड साहिब के लिए रवाना हो गया। इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध हिमालयी तीर्थ स्थल श्री हेमकुण्ड साहिब की वार्षिक यात्रा का औपचारिक आगाज हो गया है।
जयकारों से गूंजा गोविंदघाट, आस्था का सैलाब
धार्मिक उल्लास और अटूट आस्था से सराबोर गोविंदघाट गुरुद्वारा परिसर इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना। जैसे ही जत्थे ने प्रस्थान किया, पूरा क्षेत्र जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल” के गगनभेदी जयकारों से गुंजायमान हो उठा। दुर्गम रास्तों और कठिन भूगोल की परवाह किए बिना देश-विदेश से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं के चेहरों पर आध्यात्मिक खुशी साफ देखी जा सकती थी। सिक्ख मर्यादा के अनुसार, इस प्रथम जत्थे का नेतृत्व पंच प्यारों द्वारा किया जा रहा है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, चमोली पुलिस मुस्तैद
हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन और चमोली पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए संपूर्ण गोविंदघाट से लेकर हेमकुण्ड साहिब तक के पैदल मार्ग पर भारी पुलिस बल और एसडीआरएफ तैनात की गई है।
“श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूरे यात्रा मार्ग पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि देश-विदेश से आने वाले प्रत्येक तीर्थयात्री को सुरक्षित और सुलभ वातावरण मिल सके।”
— एसपी सुरजीत पंवार
आज घांघरिया में विश्राम, कल खुलेंगे हेमकुंड साहिब के कपाट
तय कार्यक्रम के अनुसार, गोविंदघाट से रवाना हुआ यह पहला जत्था आज शाम अपने अगले पड़ाव घांघरिया पहुंचेगा, जहां रात्रि विश्राम की व्यवस्था गुरुद्वारे में की गई है। इसके बाद, कल यानी 23 मई 2026 की अलसुबह श्रद्धालु अपने अंतिम और सबसे कठिन पड़ाव की ओर प्रस्थान करेंगे।
परंपरानुसार, जैसे ही यह प्रथम जत्था शनिवार सुबह पवित्र धाम पहुंचेगा, वैसे ही मुख्य गुरुद्वारे में विशेष अरदास और धार्मिक विधि-विधान के साथ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष के दर्शनार्थ आधिकारिक रूप से खोल दिए जाएंगे।


