गोपेश्वर।उच्च हिमालयी भ्यूंडार घाटी में स्थित पौराणिक तीर्थ लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट आज, 22 मई को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए हैं। सुबह 11 बजकर 15 मिनट के शुभ मुहूर्त पर जैसे ही मुख्य गर्भगृह के द्वार खुले, पूरा परिसर ‘जय लक्ष्मण’ और ‘जय बदरीविशाल’ के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
शेषनाग के अवतार और लोकपाल घाटी के आराध्य देव भगवान लक्ष्मण को समर्पित इस प्राचीन मंदिर के प्रति देश-विदेश के श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। कपाट खुलने के साथ ही अब आगामी लगभग चार महीनों के लिए इस उच्च हिमालयी धाम की यात्रा विधिवत रूप से शुरू हो गई है।
15 हजार फीट की ऊंचाई पर अध्यात्म का संगम
समुद्रतल से लगभग 15,225 फीट की ऊंचाई पर पवित्र दंडी पुष्कर्णी सरोवर के समीप स्थित यह धाम प्राकृतिक सौंदर्य, अध्यात्म और हिमालयी संस्कृति का अद्भुत संगम है। अत्यधिक ऊंचाई और विषम भूगोल के बावजूद, कपाट खुलने के ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे थे। कपाट खुलते ही भक्तों ने पवित्र सरोवर में स्नान कर भगवान लक्ष्मण के दिव्य विग्रह के दर्शन किए और विश्व कल्याण की कामना की।
साझी संस्कृति की अनूठी मिसाल
सिख और हिंदू आस्था का केंद्र: भ्यूंडार घाटी अपनी इस साझी विरासत के लिए जानी जाती है, जहां हिंदुओं के पवित्र लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के ठीक समीप सिखों का विश्व प्रसिद्ध तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब स्थित है।
लक्ष्मण मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही अब शनिवार को श्री हेमकुंड साहिब के कपाट भी खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही इस पावन घाटी में अगले चार महीनों तक आस्था, श्रद्धा और पर्यटन का भव्य समागम देखने को मिलेगा। गुरुद्वारा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा व सुविधा के लिए कड़े इंतजाम किए हैं।


