‘केदारखंड ज्योति’ में महिला उत्पीड़न से लेकर बुजुर्गों की उपेक्षा तक के सवाल, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को भी दी आवाज
चमोली/पोखरी। समाज में तेजी से बदलते मूल्यों के बीच बुजुर्गों की उपेक्षा, महिलाओं के साथ होने वाला उत्पीड़न और बेटियों को लेकर आज भी कायम संकीर्ण सोच जैसे सवाल अक्सर चर्चा में तो आते हैं, लेकिन इनकी पीड़ा समाज की संवेदनाओं तक कितनी पहुंच पाती है, यह बड़ा सवाल है। चमोली के शिक्षक एवं कवि कैलाश चंद्र उप्रेती ‘कोमल’ ने इन्हीं सवालों को अपनी कविताओं का विषय बनाकर साहित्य के माध्यम से समाज को आईना दिखाने का प्रयास किया है। उनका काव्य संग्रह ‘केदारखंड ज्योति’ मनोरंजन से आगे बढ़कर सामाजिक चेतना जगाने वाली रचनाओं का संग्रह बनकर सामने आया है।
कवि ने संग्रह में समाज की उन विसंगतियों को शब्द दिए हैं, जिनसे आम आदमी रोजाना रूबरू होता है। महिला उत्पीड़न, वृद्धाश्रमों में बढ़ती बुजुर्गों की संख्या और बालिकाओं के प्रति कुंठित एवं संकीर्ण विचारधारा जैसे विषयों को उन्होंने संवेदनशीलता के साथ कविताओं में पिरोया है। इन रचनाओं के जरिए बदलते सामाजिक परिवेश में रिश्तों और मानवीय मूल्यों के कमजोर पड़ने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
बुजुर्गों की पीड़ा और बेटियों के सवाल को बनाया काव्य का विषय
कवि कैलाश उप्रेती का कहना है कि समाज की प्रगति केवल भौतिक विकास से नहीं आंकी जा सकती। जब घर के बुजुर्ग अकेलेपन और उपेक्षा का सामना करें और बेटियों के प्रति सोच में समानता का अभाव बना रहे, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। इसी सोच ने उन्हें सामाजिक विषयों को अपनी कविताओं में प्रमुखता देने के लिए प्रेरित किया।
‘केदारखंड ज्योति’ में सामाजिक सरोकारों के साथ पहाड़ की प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं को भी स्थान मिला है। प्रकृति की मनोहारी छटा, पहाड़ का परिवेश और मनुष्य के भीतर चलने वाले भावनात्मक द्वंद्व को कवि ने अपनी रचनाओं में अभिव्यक्ति दी है। इस तरह संग्रह सामाजिक चेतना, प्रकृति और संवेदना का समन्वय प्रस्तुत करता है।
शिक्षक की भूमिका के साथ साहित्य साधना भी जारी
कैलाश चंद्र उप्रेती वर्तमान में राजकीय इंटर कॉलेज गोदली में शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षण के साथ उनका साहित्य के प्रति जुड़ाव लगातार बना हुआ है। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें देवनागरी सम्मान, साहित्य श्री सम्मान, साहित्य गौरव सम्मान और हिंदी भूषण शिखर सम्मान सहित विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
‘कविता समाज को सोचने के लिए मजबूर करे’
कवि उप्रेती के अनुसार कविता सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। कविता में समाज के दर्द, सवाल और बदलाव की आकांक्षा को आवाज देने की क्षमता होती है। उनका प्रयास है कि ‘केदारखंड ज्योति’ पढ़ने वाला पाठक केवल कविताओं की भावनात्मक अनुभूति तक सीमित न रहे, बल्कि उनमें उठाए गए सामाजिक सवालों पर भी ठहरे और चिंतन करे। यही इस काव्य संग्रह की मूल भावना है।

