मशकबीन, ढोल-दमाऊं और भोंकरों की गूंज से गुंजायमान हुआ नंदा का मायका, हजारों श्रद्धालुओं के रैले ने बढ़ाई यात्रा की भव्यता
गोपेश्वर। मां नंदा की बड़ी जात अब अपने अगले पड़ाव कनोल पहुंच गई है। आला गांव से विदाई के बाद मां नंदा की देव डोलियों, सैकड़ों छंतोलियों और हजारों श्रद्धालुओं का कारवां जोखना और सितेल होते हुए नंदानगर के अंतिम गांव कनोल पहुंचा। यहां ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बड़ी जात का भव्य स्वागत किया। मशकबीन, ढोल-दमाऊं और भोंकरों की गूंज के बीच मां नंदा के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान रहा।
रामणी गांव के बाद बड़ी जात में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। आला, जोखना और सितेल गांवों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा में शामिल हुए। इससे बड़ी जात का कारवां अब आस्था के अभूतपूर्व जनसैलाब में तब्दील हो गया है। बंड नंदा, कुरुड़-दशोली की नंदा डोलियों के साथ अन्य देव डोलियां, सैकड़ों छंतोलियां और हजारों श्रद्धालु बड़ी जात की भव्यता में चार चांद लगा रहे हैं। तीन चौसिंघा खाड़ू भी मां नंदा के साथ कैलाश की ओर प्रस्थान कर रहे हैं।
आला की विदाई पर छलकी भावनाएं
आला गांव में रातभर बारिश के बावजूद मां नंदा के लोकगीत और जागर गूंजते रहे। ग्रामीणों ने श्रद्धालुओं के लिए भोजन, आवास और अन्य सुविधाओं का इंतजाम किया। सुबह मां नंदा की डोलियों और श्रद्धालुओं को लोकगीतों और जागरों के बीच अगले पड़ाव कनोल के लिए विदाई दी गई। आला के ग्रामीणों के अतिथि सत्कार से श्रद्धालु बेहद खुश नजर आए।
बड़ी जात के पड़ावों पर स्थानीय ग्रामीणों की ओर से जिस तरह श्रद्धालुओं की सेवा की जा रही है, वह यात्रा की लोकपरंपरा और सामुदायिक भावना को जीवंत कर रही है। खास बात यह है कि ग्रामीण अपने स्तर पर हजारों श्रद्धालुओं के खाने-पीने और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं।
कनोल में उमड़ा आस्था का सैलाब
दोपहर बाद एक-एक कर देव डोलियों और छंतोलियों के कनोल पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। मां भगवती के चौक में कनोल के ग्रामीणों ने सभी डोलियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। ढोल-दमाऊं, मशकबीन और भोंकरों की धुन के बीच नंदा के जयकारों ने पूरे गांव को भक्तिमय कर दिया।
रामणी के बाद बड़ी जात में जिस तरह श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है, उसने इस यात्रा को हिमालयी महाकुंभ की भव्यता प्रदान कर दी है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु बड़ी जात में शामिल होने पहुंच रहे हैं। हजारों लोगों का यह सैलाब मां नंदा के प्रति लोगों की आस्था, विश्वास, श्रद्धा और समर्पण को प्रतिबिंबित कर रहा है।
मायके से कैलाश की ओर बढ़ रहा कारवां
मां नंदा की बड़ी जात के प्रत्येक पड़ाव पर मायके के ग्रामीण अपनी आराध्य देवी को भावपूर्ण विदाई दे रहे हैं। लोकगीतों और जागरों के बीच छलकती आंखें और जयकारों के बीच आगे बढ़ती देव डोलियां इस यात्रा की भावनात्मक गहराई को दर्शा रही हैं। अब कनोल में रात्रि प्रवास के बाद मां नंदा की बड़ी जात कैलाश की ओर अपने अगले पड़ाव के लिए प्रस्थान करेगी।


