मेला समिति ने जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और पत्रकारों को मेले में शामिल होने का दिया निमंत्रण
गोपेश्वर। ग्राम पाणा में आयोजित होने वाले मां नन्दा अष्टमी सांस्कृतिक पर्यटन विकास मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेला 16 से 19 सितंबर तक आयोजित किया जाएगा। मेले के आयोजन को लेकर ग्रामीणों एवं मेला समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी चमोली को निमंत्रण पत्र भेंट कर उन्हें मेले में शामिल होने का आमंत्रण दिया। प्रतिनिधिमंडल ने मेले की धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से जिलाधिकारी को अवगत कराया।
रघुबीर बिष्ट ने बताया कि पाणा में मां नन्दा अष्टमी मेले का आयोजन सदियों से आस्था और परंपरा के साथ होता आ रहा है। उच्च हिमालयी क्षेत्र से प्राप्त ब्रह्म कमल और विभिन्न वन पुष्पों से सजकर ग्रामीण मां नन्दा के मंदिर प्रांगण में एकत्रित होते हैं। ढोल-दमाऊ, शंखनाद और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के बीच देवी-देवताओं का आह्वान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि देव अवतरण के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप वन पुष्प और ब्रह्म कमल प्रदान किए जाते हैं।
महिला मंगल दलों और बच्चों को मिलेगा प्रतिभा दिखाने का मंच
मेले में धार्मिक आयोजनों के साथ सांस्कृतिक, संस्कृत और खेलकूद प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। संपूर्ण क्षेत्र के महिला मंगल दलों, युवक मंगल दलों तथा विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि मेले का उद्देश्य केवल धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रखना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों और युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान दिलाकर उन्हें आगे बढ़ने का मंच उपलब्ध कराना भी है।
नवविवाहित दंपतियों की रहती है विशेष आस्था
मेले में नवविवाहित दंपतियों की भी विशेष आस्था रहती है। नवविवाहित जोड़े दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि और संतान प्राप्ति के लिए मां नन्दा से आशीर्वाद मांगते हैं। ग्रामीणों के अनुसार मां नन्दा की कृपा से मनोकामना पूर्ण होने की मान्यता सदियों से चली आ रही है।
ककड़ी, मुंगरी और फलों का लगेगा भोग
मेले के समापन अवसर पर ग्रामीण ककड़ी, मुंगरी, आड़ू, सेब समेत विभिन्न फलों और स्थानीय फसलों का भोग मां नन्दा को अर्पित करेंगे। इसके बाद सुगंधित घास से निर्मित मां नन्दा की प्रतिमा को पारंपरिक आभूषणों से सजाकर कैलाश की ओर विदाई दी जाएगी। विदाई के दौरान ग्रामीणों की आंखें नम हो उठती हैं। माता-बहनों के रुदन और श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से वातावरण भक्तिमय हो जाता है।
मेले से पहले सड़क खोलने की मांग
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मेले के दौरान पर्याप्त सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और स्वास्थ्य शिविर स्थापित करने की मांग की। साथ ही पीएमजीएसवाई पोखरी के अधिकारियों को सड़क मार्ग दुरुस्त करने के निर्देश देने का आग्रह किया गया।
ग्रामीणों ने विशेष रूप से पगना से पाणा तक पैदल मार्ग तथा झिंझी पुल से ईरानी होते हुए पाणा तक मोटर मार्ग को मेला शुरू होने से पहले सुचारु कराने की मांग रखी, ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी न हो।
प्रतिनिधिमंडल के अनुरोध पर जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा मेले के दौरान सुरक्षा, स्वास्थ्य और आवागमन की व्यवस्था चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए।
इस अवसर पर पूर्व प्रधान एवं पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट, मेला अध्यक्ष गैरव सिंह बिष्ट, पूर्व प्रधान ईरानी मोहन सिंह नेगी, प्रधान पाणा राजीव पनियाल, पूर्व सैनिक वीरेंद्र सिंह फर्स्वाण, सामाजिक कार्यकर्ता दिलबर सिंह, कलीराम समेत अन्य लोग मौजूद रहे।


