सीमावर्ती आजीविकाओं को बढावा भारतीय सेना और नागरिक प्रशासन के सहयोग से भारत के प्रथम गाँव माणा में शॉपिंग आउटलेट-सह-रेस्तरां का उद्धाटन

jantakikhabar
0 0
Read Time:4 Minute, 46 Second

बदरीनाथ/चमोली। देश के प्रथम गांव माणा में अब सीमांत क्षेत्र की महिलाओं के पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की नई पहल शुरू हो गई है। भारतीय सेना की सूर्य कमान ने ऑपरेशन सद्भावना के तहत माणा में ‘यार्न्स ऑफ योर’ परियोजना के अंतर्गत शॉपिंग आउटलेट-सह-रेस्तरां और नवनिर्मित बुनाई केंद्रों का उद्घाटन किया। पहल का उद्देश्य सीमांत गांवों की पारंपरिक बुनाई और कढ़ाई कला को संरक्षित करने के साथ स्थानीय महिलाओं को कौशल, स्वरोजगार और बाजार उपलब्ध कराना है।

‘यार्न्स ऑफ योर’ परियोजना के माध्यम से हिमालयी क्षेत्र में पीढ़ियों से चली आ रही बुनाई और कढ़ाई की कला को आधुनिक डिजाइन, नई उत्पादन तकनीक और मौजूदा बाजार की मांग से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सेना की ओर से स्थानीय महिलाओं को व्यावसायिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, आधुनिक कार्यस्थल और विपणन सहयोग उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि पारंपरिक शिल्प उनके लिए आय का स्थायी जरिया बन सके।

इस पहल की शुरुआत माणा और नीति क्षेत्र के निवासियों को परियोजना से जोड़कर की गई। दिसंबर 2024 में घिंगरान गांव में पहला बुनाई केंद्र स्थापित किया गया। इसके बाद न्यू चमेली और रौली भुंडार में भी बुनाई केंद्र स्थापित किए गए। इन केंद्रों में स्थानीय महिलाओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण में बुनाई एवं कढ़ाई का काम करने की सुविधा मिल रही है। 

माणा में शुरू किया गया शॉपिंग आउटलेट इस परियोजना की अहम कड़ी माना जा रहा है। बदरीनाथ आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक यहां सीमांत गांवों की महिलाओं और स्थानीय कारीगरों द्वारा तैयार उत्पादों को देख और खरीद सकेंगे। इससे पारंपरिक उत्पादों को सीधे बाजार उपलब्ध कराने के साथ स्थानीय शिल्पकारों की आय बढ़ाने की संभावनाएं बनेंगी।

सेना के अनुसार परियोजना को आगे चमोली के अन्य सीमांत गांवों तक विस्तार देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे अधिक महिलाओं और बुनकरों को कौशल विकास एवं स्वरोजगार से जोड़ने का अवसर मिलेगा।

इस अभियान को इबेक्स ब्रिगेड और सहयोगी संगठनों के समन्वय का परिणाम बताया गया है। परियोजना के जरिए सेना और सीमांत ग्रामीणों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर जोर है। सेना की ओर से प्रारंभिक सहयोग और दिशा देने के साथ स्थानीय समुदाय को इन गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी और स्वामित्व के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य उत्तराखंड की पारंपरिक हस्तशिल्प कला को देशभर में पहचान दिलाने और भविष्य में अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने का है। माणा का शॉपिंग आउटलेट इस दिशा में स्थानीय उत्पादों और पर्यटन के बीच सीधा संपर्क स्थापित करने का माध्यम बनेगा।

सीमांत क्षेत्रों में जहां रोजगार के सीमित अवसर और पलायन बड़ी चुनौती हैं, वहां बुनाई-कढ़ाई जैसे पारंपरिक हुनर को बाजार से जोड़ने की यह पहल महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ स्थानीय आजीविका को मजबूत करने की कोशिश है। ऑपरेशन सद्भावना के तहत शुरू की गई परियोजना संस्कृति संरक्षण, कौशल विकास और स्वरोजगार को एक साथ जोड़ रही है।

Avatar

About Post Author

jantakikhabar

9897129437 गोपेश्वर चमोली ranjeetnnegi@gmail.com
Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Next Post

सहकारिता से गांवों के सर्वांगीण विकास का संकल्प : गजेंद्र रावत

निजमुला सप्तकुंड घाटी में नवनिर्वाचित जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष का ढोल-नगाड़ों से स्वागत, युवाओं और महिलाओं को सहकारिता से जोड़ने पर जोर चमोली। जिला सहकारी बैंक चमोली-रुद्रप्रयाग के नवनिर्वाचित अध्यक्ष गजेंद्र सिंह रावत के अपने गृह क्षेत्र निजमुला सप्तकुंड घाटी पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत किया। […]

You May Like

Subscribe US Now

Share
error: Content is protected !!