ज्योतिर्मठ। पहाड़ों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के सरकार और प्रशासन के तमाम बड़े दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। चारधाम यात्रा का आगाज हो चुका है और सीमांत क्षेत्र जोशीमठ में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं सहित स्थानीय निवासियों की सुरक्षा दांव पर लगी है। सबसे चिंताजनक स्थिति आपातकालीन सेवा ‘108’ एंबुलेंस की है, जो खुद ही ‘बीमार’ होकर रास्ते में खड़ी हो जा रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि यदि यात्रा के दौरान कोई आपातकालीन स्थिति पैदा होती है, तो मरीजों को समय पर अस्पताल कैसे पहुंचाया जाएगा?
बीच सफर में जवाब दे रही ‘जीवनदायिनी’
ताजा मामला जोशीमठ आर्मी कैंप के पास का है, जहां मरीजों के लिए जीवनदायिनी कही जाने वाली 108 एंबुलेंस सड़क के एक बेहद तीव्र मोड़ पर अचानक खराब हो गई। बीच सड़क पर एंबुलेंस के इस तरह हांफने से न सिर्फ मरीजों की जान पर बन आई, बल्कि संकरे पहाड़ी मार्ग पर यातायात व्यवस्था के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो गया।
शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन
स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस खटारा हो चुकी एंबुलेंस को लेकर कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन हर बार उनकी मांग को अनसुना कर दिया गया। बार-बार ध्यान आकर्षण कराने के बावजूद भी इस गंभीर समस्या का कोई स्थाई समाधान नहीं निकाला जा रहा है।
“एक तरफ जहां हेमकुंड साहिब और बद्रीनाथ धाम की यात्रा के चलते क्षेत्र में वाहनों और श्रद्धालुओं का भारी दबाव है, वहीं दूसरी तरफ आपातकालीन सेवाओं की यह बदहाली प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल रही है।”
— पूर्व ब्लॉक प्रमुख प्रकाश रावत
जनता ने की नई एंबुलेंस की मांग
यात्रा सीजन में किसी बड़े हादसे या आपातकाल के दौरान यह लापरवाही भारी पड़ सकती है। आक्रोशित स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से सुदूर क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए जल्द से जल्द नई और तकनीकी रूप से दुरुस्त एंबुलेंस तैनात करने की मांग की है, ताकि किसी को अपनी जान न गंवानी पड़े।


