चमोली।राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) नई दिल्ली एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण नैनीताल के निर्देशानुसार, जिला कारागार चमोली में एक अनूठी और जनोपयोगी पहल की शुरुआत की गई है। जेल के मुलाकाती क्षेत्र में विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987, विधिक सेवा नियमावली 2023 और जेल नियमावली 2016 के तहत ‘विधिक सेवा हेल्प डेस्क’ का विधिवत शुभारंभ जनपद न्यायाधीश विंध्याचल सिंह द्वारा किया गया।
इस हेल्प डेस्क के माध्यम से जेल में बंद कैदियों से मिलने आने वाले उनके परिजनों और आगंतुकों को अब एक ही छत के नीचे सभी जरूरी कानूनी जानकारियां और सहायता निःशुल्क मिल सकेंगी।
उद्घाटन के अवसर पर जनपद न्यायाधीश विंध्याचल सिंह ने बताया कि इस हेल्प डेस्क को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और जरूरतमंदों को बिना किसी आर्थिक बोझ के त्वरित कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा”अक्सर जेल में निरुद्ध कैदियों के परिजनों को कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने पड़ते हैं। अब इस हेल्प डेस्क के माध्यम से उन्हें जमानत, अपील, दस्तावेजीकरण और कानूनी प्रतिनिधित्व (वकील) संबंधी मामलों की पूरी जानकारी मौके पर ही दी जाएगी। इससे हिरासत में लिए गए व्यक्तियों के मुकदमों की प्रगति और जमानत की स्थिति स्पष्ट होगी, जिससे न्याय प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी बनेगी।”
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चमोली के सचिव पुनीत कुमार ने इस पहल को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि जेल में मुलाकात के लिए आने वाले बंदियों के परिवारजन, खासकर गरीब तबके के लोग, कानूनी अज्ञानता के कारण बेहद परेशान रहते हैं। उन्हें अक्सर यह भी पता नहीं होता कि उनके परिजन का मुकदमा किस स्तर पर है, अगली तारीख कब है या जमानत की प्रक्रिया क्या है।
सचिव ने आश्वस्त किया कि यह हेल्प डेस्क ऐसे परिवारों के लिए काफी मददगार साबित होगी। यहाँ मुलाकाती न केवल अपने परिजनों के मुकदमों की अद्यतन (अपडेटेड) स्थिति जान सकेंगे, बल्कि उन्हें उनके कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश विंध्याचल सिंह के साथ जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव पुनीत कुमार, सी.एल.ए.डी.सी. समीर बहुगुणा, पैनल अधिवक्ता शंकर सिंह मनराल, रेजा चौधरी व गीता बिष्ट मौजूद रहे। इसके अलावा जेल प्रशासन की ओर से प्रभारी कारापाल हिमांशु जोशी, उप कारापाल तनीषा राजौरी सहित जेल के तमाम कर्मचारी और विधिक सेवा प्राधिकरण में कार्यरत अधिकार मित्र (पीएलवी) मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

