गोपेश्वर। निजमुला घाटी के दूरस्थ ईराणी गांव की गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को करीब 10 किलोमीटर का दुर्गम रास्ता पैदल तय करना पड़ा। सड़क पर भूस्खलन और उफनते गाड़-गदेरों के चलते गर्भवती हेमा नेगी को जान जोखिम में डालकर पगना गांव तक पहुंचाया गया। इसके बाद वाहन से उसे जिला अस्पताल गोपेश्वर लाया गया।
दशोली विकासखंड की निजमुला घाटी में बारिश के दौरान सड़क व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। ईराणी गांव के पगना से आगे भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग बाधित होने से वाहनों की आवाजाही बंद है। वहीं, लगातार बारिश के कारण गाड़-गदेरे उफान पर हैं। ऐसे हालात में हेमा नेगी को प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचाना परिजनों के लिए बड़ी चुनौती बन गया।
बताया गया कि आशा कार्यकत्री और परिजनों ने महिला को पैदल ही अस्पताल की ओर ले जाने का निर्णय लिया। रास्ते में जगह-जगह भूस्खलन और गिरते पत्थरों के बीच करीब 10 किलोमीटर का सफर तय किया गया। इस दौरान उफनते गाड़-गदेरों के तेज बहाव को भी पार करना पड़ा। किसी तरह महिला को पगना गांव पहुंचाया गया, जहां से वाहन की मदद से उसे गाड़ी गांव होते हुए जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया।
ईराणी की ग्राम प्रधान दीपा देवी और ग्रामीणों ने बताया कि झींझी मोटर पुल निर्माण की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन किया जा रहा है, लेकिन अब तक पुल का निर्माण नहीं हो पाया है। ग्रामीणों के आवागमन के लिए बनाया गया वैकल्पिक मार्ग भी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया है। इससे ईराणी समेत आसपास के गांवों के लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दौरान पाणा और ईराणी जैसे दूरस्थ गांवों की गर्भवती महिलाओं को हर वर्ष इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण प्रसूताओं की जान पर खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से झींझी मोटर पुल का निर्माण शीघ्र कराने और वैकल्पिक मार्ग को दुरुस्त करने की मांग की है।


