गोपेश्वर।गर्मी के मौसम में जब पहाड़ तपते थे, तब इस बार चमोली जनपद के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हो रहे हिमपात और घाटी क्षेत्रों में बारिश ने जनजीवन को हतप्रभ कर दिया है। मई माह के आगाज से ठीक पहले मौसम के इस बिगड़े मिजाज ने न केवल लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, बल्कि जलवायु परिवर्तन को लेकर गंभीर चिंताएं भी पैदा कर दी हैं।
बीते बुधवार से मौसम ने यकायक करवट बदली। बदरीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और भगवान रुद्रनाथ की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा हिमपात होने से समूचा क्षेत्र कड़ाके की ठंड की चपेट में है। वहीं, निचले क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। गुरुवार को भी यही सिलसिला जारी रहा, जिससे तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
आमतौर पर इस समय लोग ग्रीष्मकालीन पहनावे की ओर बढ़ जाते हैं, लेकिन कड़ाके की ठंड ने लोगों को एक बार फिर भारी जैकेट और गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर कर दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जाड़ों के महीनों में इस बार न तो पर्याप्त बारिश हुई और न ही बर्फबारी, जिसके चलते सर्दी का एहसास कम रहा। लेकिन अब, जब ग्रीष्म ऋतु का दौर है, तब हो रही बर्फबारी प्राकृतिक असंतुलन का संकेत दे रही है,क्षेत्र के बुद्धिजीवी और स्थानीय लोग मौसम के इस मिजाज को सीधे तौर पर जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देख रहे है, मई माह के पास बर्फ गिरना सामान्य ऋतु चक्र के विपरीत है, जाड़ों में सूखा रहना और गर्मियों में भारी बारिश व ठंड का बढ़ना पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।मौसमी चक्र में आ रहा यह असामान्य बदलाव आने वाले समय में कृषि और बागवानी के लिए भी बड़ा संकट खड़ा कर सकता है। फिलहाल, चमोली जिले की घाटियों में ठंडी हवाओं का दौर जारी है।


