चमोली। एक ओर सरकार ‘डिजिटल इंडिया’ और सुदूर गांवों को जोड़ने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर निजमुला घाटी के पगना-पाणा-ईरानी मोटर मार्ग पर निर्माणाधीन झिंजी पुल विभाग और सरकार की कार्यप्रणाली की पोल खोल रहा है। पिछले आठ वर्षों से यह पुल अधर में लटका है, जिसके कारण हजारों की आबादी आज भी आदि मानव युग जैसी जीवनशैली जीने को मजबूर है।
ग्रामीणों का सबसे बड़ा आक्रोश क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के खिलाफ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस, दोनों ही दलों के बड़े-बड़े दिग्गज नेता निजमुला घाटी में ‘प्रवास’ के लिए आते हैं, बड़ी-बड़ी जनसभाएं होती हैं, लेकिन जब बात झिंजी पुल की आती है, तो सभी मौन साध लेते हैं।
“वोट के समय और प्रवास के नाम पर नेता यहाँ आते तो हैं, लेकिन हमारी सबसे बड़ी समस्या—पुल निर्माण—को लेकर कोई भी जहमत उठाने को तैयार नहीं है। नेताओं के लिए यह केवल एक दुर्गम इलाका हो सकता है, लेकिन हमारे लिए यह अस्तित्व की लड़ाई है।” दीपा देवी ग्राम प्रधान ईरानी
पुल निर्माण की जिम्मेदारी संभाल रहे पीएमजीएसवाई के अधिकारियों का रवैया भी ग्रामीणों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में देरी की शिकायत करने के लिए जब अधिकारी को फोन किया जाता है, तो वे फोन उठाना तक मुनासिब नहीं समझते। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब धरातल पर संपर्क के साधन ही नहीं हैं और जिम्मेदार अधिकारी संवाद से बच रहे हैं, तो ‘डिजिटल इंडिया’ का सपना कैसे साकार होगा
बीमारों और गर्भवती महिलाओं को डंडी-कांडी के सहारे उफनते गदेरों के बीच से ले जाना किसी खतरे से कम नहीं है, सड़क संपर्क न होने से राशन और जरूरी सामान की ढुलाई का खर्चा आम आदमी की कमर तोड़ रहा है।
पाणा ईरानी की क्षेत्र पंचायत सदस्य सीमा नेगी ने दो टूक कहा पाणा ईरानी के आक्रोशित ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है, यदि शासन-प्रशासन और पीएमजीएसवाई ने तत्काल इस सुस्त पड़े निर्माण कार्य में तेजी नहीं दिखाई, तो वे आने वाले समय में राजनीतिक कार्यक्रमों का बहिष्कार करेंगे और जिला मुख्यालय में तालाबंदी करेंगे।

