चमोली जिले के जैसाल गांव की निवासी रीना देवी पत्नी चंद्र बल्लभ डॉडरियाल चारा-पत्ती लेने के लिए जंगल गई थीं। इस दौरान वह अचानक रास्ते से गिर गईं, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए हायर सेंटर रेफर कर दिया।
परिजनों और स्थानीय लोगों के अनुसार, शनिवार सुबह जिला अस्पताल में रेफर किए जाने के बाद लगभग तीन घंटे तक एयर एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं हो सकी। इस दौरान मरीज को समय पर उच्च स्तरीय उपचार दिलाने को लेकर चिंता बनी रही।
बताया जा रहा है कि पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी ने एयर एम्बुलेंस की स्थिति की जानकारी लेने के लिए अस्पताल प्रशासन और संबंधित कर्मचारियों से बातचीत करने का प्रयास किया। इस दौरान उनकी कर्मचारियों के साथ तीखी बार्ता हुई। उनके हस्तक्षेप के बाद मरीज को एम्बुलेंस के माध्यम से गोचर हवाई पट्टी भेजा गया, जहां से एयर एम्बुलेंस द्वारा देहरादून स्थित हायर सेंटर के लिए रवाना किया गया।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ की स्वास्थ्य व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर सवाल खड़े करती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिला अस्पताल गोपेश्वर में गंभीर मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त विशेषज्ञ चिकित्सक, आधुनिक जांच सुविधाएं और आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को अक्सर हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना ही एक बड़ी चुनौती है। ऐसे में रेफरल प्रक्रिया में होने वाली देरी मरीजों और उनके परिजनों की चिंता और बढ़ा देती है। लोगों का मानना है कि जिला अस्पतालों को विशेषज्ञ सुविधाओं और संसाधनों से सशक्त बनाया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक मरीजों का उपचार जिले में ही संभव हो सके।
स्थानीय नागरिकों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग से स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने तथा एयर एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता को और अधिक प्रभावी बनाने की मांग की है।


