गोपेश्वर। सेवारत एलटी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त किए जाने की मांग को लेकर राजकीय शिक्षक संघ जनपद चमोली ने सरकार के समक्ष अपनी मांग तेज कर दी है। संघ के साथ हुई वार्ता के क्रम में चमोली जिले के तीनों विधायकों—बदरीनाथ विधायक लखपत सिंह बुटोला, कर्णप्रयाग विधायक अनिल नौटियाल और थराली विधायक भूपाल राम टम्टा—ने मुख्यमंत्री को पत्र प्रेषित कर सेवारत एलटी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त रखने का अनुरोध किया है।
राजकीय शिक्षक संघ जनपद चमोली प्रकाश चौहान का कहना है कि उत्तराखंड में वर्ष 2014 में उत्तराखंड अधीनस्थ शिक्षा (प्रशिक्षित स्नातक) सेवा नियमावली लागू की गई थी, जिसमें एलटी पदों पर नियुक्ति के लिए टीईटी को अनिवार्य योग्यता बनाया गया। संघ के अनुसार वर्ष 2014 से पूर्व नियुक्त किए गए सभी शिक्षक उस समय लागू निर्धारित शैक्षिक एवं अन्य अर्हताएं पूरी करने के बाद ही नियुक्त हुए थे।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर बाद में टीईटी की अनिवार्यता लागू करना न तो तार्किक है और न ही नियमसम्मत। इससे शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है।
राजकीय शिक्षक संघ जनपद चमोली की जिला कार्यकारिणी ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि सेवारत एलटी शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाए और सभी स्तरों पर लंबित पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाए। संघ ने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री स्तर पर इस मामले में सकारात्मक निर्णय लेकर शिक्षकों को राहत दी जाएगी।


