चमोली। समुद्र तल से लगभग 10 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध फ्यूला नारायण मंदिर के कपाट श्रावण संक्रांति के अवसर पर विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मंदिर में सदियों पुरानी परंपराओं का आज भी पूरी आस्था और श्रद्धा के साथ निर्वहन किया जाता है।
फ्यूला नारायण मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान नारायण की सेवा में पुरुष पुजारी के साथ महिला पुजारी भी समान रूप से भागीदारी निभाती हैं। भगवान नारायण के श्रृंगार का अधिकार महिला पुजारी को प्राप्त है, जो इस मंदिर की अनूठी परंपरा मानी जाती है।
मंदिर में भगवान विष्णु चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान हैं। उनके साथ माता महालक्ष्मी तथा जय-विजय द्वारपाल के रूप में स्थापित हैं। इसके अलावा क्षेत्रपाल, घंटाकर्ण, नंदा-सुनंदा, जग देवता और बंदेबियां की भी परंपरागत रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। यहां पूजा-पद्धति आज भी प्राचीन ऋषि परंपरा के अनुसार संपन्न होती है।
मान्यता है कि भगवान नारायण को सातूं वाड़ी का भोग अत्यंत प्रिय है, जिसे विशेष रूप से अर्पित किया जाता है। मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष श्रावण संक्रांति को खुलते हैं और नंदा अष्टमी के बाद नवमी तिथि को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।
मंदिर में पुजारी नियुक्त करने की भी अनूठी परंपरा है। भरकी, भेंटा, पिलखी, गंवाणा और अरोसी गांवों के एक-एक परिवार की बारी के अनुसार प्रतिवर्ष पुजारी नियुक्त किए जाते हैं। इस वर्ष आशीष पंवार मुख्य पुजारी तथा आनंदी देवी महिला पुजारी के रूप में भगवान नारायण की सेवा कर रही हैं।
कपाटोद्घाटन के अवसर पर भरकी के प्रधान चंद्रमोहन सिंह, पूर्व प्रधान दुर्लभ सिंह रावत, पूर्व प्रधान लक्ष्मण सिंह, पंचनाम देवता के पुजारी अब्बल सिंह पंवार, आचार्य मनोहर प्रसाद सेमवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। फ्रेंड्स ग्रुप के 25 से अधिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर परिसर को सजाने में योगदान दिया। कार्यक्रम में रघुवीर सिंह चौहान, लक्ष्मण सिंह पंवार, बलवंत सिंह नेगी, मेला समिति के कोषाध्यक्ष नंद सिंह नेगी, दीपा देवी, आशुतोष नेगी, जितेंद्र पंवार, जितेंद्र कंडवाल, किशन सिंह, रणजीत सिंह सहित अनेक श्रद्धालु मौजूद रहे।


