गोपेश्वर। हरेला पर्व के अवसर पर भेषज संघ चमोली की ओर से गोपेश्वर मुख्यालय के समीप पपड़ियाणा गांव में कृषि, बागवानी, औषधीय पौधों एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर जनजागरूकता गोष्ठी और वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बंजर होती कृषि भूमि का सदुपयोग, किसानों की आय में वृद्धि तथा औषधीय एवं फलदार पौधों के माध्यम से स्वरोजगार को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ हरेला पर्व की परंपरा के अनुरूप पौधरोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने किसानों से आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियां अपनाने, फलदार एवं औषधीय पौधों की खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
गोष्ठी में ग्रामीणों ने जंगली जानवरों से फसलों को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाते हुए कहा कि खेत लगातार बंजर होते जा रहे हैं। किसानों ने खेतों की सुरक्षा, तकनीकी मार्गदर्शन और विभागीय सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि बंजर भूमि पर औषधीय पौधों, जड़ी-बूटियों और फलदार वृक्षों की खेती की जा सके।
स्थानीय कृषक प्रीति नेगी ने कहा कि तकनीकी मार्गदर्शन और सुरक्षा के अभाव में किसान खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से किसानों को आवश्यक संसाधन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।
मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष संदीप सिंह रावत ने कहा कि नगर पालिका क्षेत्र में कृषि भूमि के संरक्षण और विकास के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने किसानों से सरकार की कृषि एवं बागवानी योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक खेती अपनाने की अपील की।
भाजपा जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह बर्त्वाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही हैं। किसानों को इन योजनाओं का लाभ लेकर आधुनिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
भेषज संघ चमोली के अध्यक्ष सतेंद्र सिंह असवाल ने कहा कि संस्था किसानों को औषधीय पौधों, बीज, तकनीकी जानकारी और कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से बंजर भूमि का उपयोग औषधीय खेती एवं फलदार पौधों के रोपण में करने का आह्वान किया।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह बिष्ट ने कहा कि कृषि को लाभकारी बनाने के लिए सामूहिक प्रयास, आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती को अपनाना समय की आवश्यकता है।
कार्यक्रम में सभासद दीपक बिष्ट, महेंद्र राणा, आशा नेगी सहित स्थानीय महिलाओं, किसानों और जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार रखे। समापन पर दक्षिण काली मंदिर तोक में औषधीय एवं फलदार पौधों का सामूहिक वृक्षारोपण किया गया तथा पौधों के संरक्षण का संकल्प लिया गया।


