चमोली।गैरसैण स्थाई राजधानी बनाए जाने को लेकर विधानसभा का घेराव करने जा रहे उक्रांद कार्यकर्ताओं ने पुलिस को खूब छकाया। इस दौरान उक्रांद युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी समेत तमाम कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लेकर जंगलचट्टी तथा मेहलचैंरी स्थित अस्थाई जेल में भेजा।
दरअसल बजट सत्र के पहले दिन उक्रांद का गैरसैण में स्थाई राजधानी को लेकर विधानसभा घेराव कार्यक्रम घोषित था। इसके चलते उक्रांद कार्यकर्ता प्रातः 10 बजे ही दीवालीखाल के विधानसभा प्रवेश द्वार पर जुट कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी और प्रदर्शन करने लगे। हालांकि कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए जंगलचट्टी तथा गैरसैण की ओर से भी पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया था। इधर विधानसभा भवन के भीतर राज्यपाल का अभिभाषण चल रहा था तो सड़कों पर उक्रांद के कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे। दीवालीखाल में उक्रांद कार्यकर्ता पुलिस को छकाते हुए सुरक्षा व्यवस्था को तोड़कर विधानसभा की ओर कूच करने लगे। इस दौरान तीन बैरियर भी क्षतिग्रस्त हो गए। कुछ कार्यकर्ता तो जंगल की ओर से भागकर विधानसभा परिसर से नीचे तक पहुंच गए। पुलिस पीछा करती रही किंतु जंगल में कोई भी हत्थे नहीं चढ़ पाया। यह अलग बात है कि पुलिस ने विधानसभा परिसर से नीचे ही कार्यकर्ताओं को धरदबोच लिया। इधर बैरियर तोड़कर आगे बढ़ते उक्रांद कार्यकर्ताओें को रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन चलाते हुए पानी की बौछार भी की किंतु आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार ही नहीं हुए बैरिकेंटिंग पार करने की कोशिश करते हुए वे आगे ही बढ़ते गए। भराड़ीसैण विधानसभा से करीब डेढ किमी पहले पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ता सड़क पर ही धरने पर बैठकर विधानसभा भवन तक मार्च करने की मांग पर अड़ गए। पुलिस और प्रशासन को हालात संभालने में खासा पसीना बहाना पड़ा।
विधानसभा कूच के दौरान प्रदर्शन करते हुए उक्रांद युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी का कहना था कि गैरसैण को स्थाई राजधानी बनाए जाने की मांग संविधान संम्मत है। उनका कहना था कि राज्य निर्माण के लिए 42 अपने प्राणों की आहुति देकर शहादत दी। इसके बावजूद आज भी पहाड़ी जनमानस को राज्य में सुख सुविधाओं का अभाव झेलना पड़ रहा है। हालात इस कदर खराब हैं कि जंगली जानवरों के हमलों से लोग त्रस्त हैं। स्वास्थ्य सेवा का बुरा हाल होने के कारण लोगों का जीवन खतरे में पड़ा है। युवा बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं। सरकार रोजगार देने में पूरी तरह असफल है। इसी दौरान पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाटी ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि अब गैरसैण स्थाई राजधानी बनने पर ही पहाड़ों की मूलभूत समस्याओं का निराकरण संभव है। कहा कि जो लोग पहाड़ से जीतते हैं वे देहरादून तथा हल्द्वानी में बसागत कर रहे हैं। यहां तक की राष्ट्रीय दलों के नेता प्रापर्टी कारोबार में जुटे हुए है। यह स्थिति इस राज्य के लिए अच्छी नहीं कही जा सकती है।
प्रदर्शन के दौरान कई बार हालात भी बिगड़े। कार्यकर्ताओं का जोश इस कदर भरा था कि वे पुलिस के लाख प्रयासों को भी नाकाम करते रहे। पुलिस ने उक्रांद नेता आशीष नेगी समेत तमाम आंदोलनकारियों को पकड़ कर जंगलचट्टी तथा मेहलचैंरी अस्थाई जेल भेजा। पुलिस और उक्रांद कार्यकर्ताओं के बीच पहली बार शक्ति प्रदर्शन भी देखने को मिला। खासकर महिलाएं भी पुलिस के डर से दूर रहकर सड़कों पर ही जोरदार प्रदर्शन में जुटी रही। इसके चलते हालातों को संभालने के लिए पुलिस को पसीना बहाना पड़ा। राज्य बनने के बाद उक्रांद का यह शक्ति प्रदर्शन काबिलेगौर था। अब तक उक्रांद सीमित संख्या के बावजूद सांकेतिक प्रदर्शनों तक ही सीमित रहता था। इस बार आर और पार की लड़ाई भराडीसैण के जंगल से लेकर सड़क पर देखने को मिला।
इस दौरान केंद्रीय महामंत्री वीरू सजवाण, जिलाध्यक्ष युद्धवीर सिंह नेगी, कार्यकारी अध्यक्ष पंकज पुरोहित, केएल शाह, यशपाल नेगी, जमन मनेसा, माही चमोला, एसपी पुरोहित, सुबोध बिष्ट, डा. आशुतोष भंडारी, दीपक राणा, लक्ष्मी देवी, दीपशिखा, पूजा शर्मा, धीरज सिंह, अंशुमान, अशोक बिष्ट, प्रेम पडियार, सुमित्रा चमोला समेत तमाम कार्यकर्ताओं का कहना था कि अब गैरसैण स्थाई राजधानी की अलख जगा दी गई है। सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। इस अवसर पर खास कर महिलाएं गैरसैण स्थाई राजधानी के मुद्दे को लेकर जन गीत गाते हुए सड़क पर ही झुमैला भी लगाती रही।


