चमोली। उत्तराखंड में 2027 के विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चमोली जनपद की इस महत्वपूर्ण सीट पर गजेंद्र सिंह रावत एक प्रखर और जुझारू युवा दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। छात्र राजनीति से लेकर प्रदेश स्तर के सांगठनिक पदों तक का उनका लंबा अनुभव उन्हें आगामी चुनावों के लिए एक प्रबल प्रत्याशी के रूप में स्थापित कर रहा है।
गजेंद्र सिंह रावत की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में है जिन्होंने जमीनी स्तर से अपनी राजनीति की शुरुआत की। उन्होंने छात्र राजनीति के दौर में छात्र संघ सचिव और फिर छात्र संघ अध्यक्ष जैसे पदों पर रहते हुए युवाओं की आवाज बुलंद की। उनकी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण तभी मिल गया था जब उन्होंने छात्र हितों के लिए मुखर होकर कार्य किया।
जमीनी पकड़ को और मजबूत करते हुए उन्होंने ग्रामीण राजनीति में कदम रखा। वे ग्राम प्रधान और बाद में जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए, जहाँ उन्होंने क्षेत्रीय विकास की बारीकियों को समझा। इसके अतिरिक्त, चमोली जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल को आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूती देने के लिए याद किया जाता है।
भारतीय जनता पार्टी के सांगठनिक ढांचे में भी गजेंद्र सिंह रावत का कद लगातार बढ़ा है,भाजपा जिला युवा मोर्चा अध्यक्ष और प्रदेश मंत्री (युवा मोर्चा) के रूप में युवाओं को एकजुट करने में सफल रहे,दो बार जिला महामंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालते हुए उन्होंने जिले भर के कार्यकर्ताओं के बीच अपनी मजबूत पैठ बनाई है।
बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र में विकास और स्थानीय मुद्दों को लेकर उनकी सक्रियता ने उन्हें जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनकी ‘जुझारू युवा नेता’ वाली छवि और त्रि-स्तरीय पंचायती राज से लेकर बैंक प्रबंधन तक का अनुभव उन्हें अन्य दावेदारों की तुलना में एक ठोस विकल्प के रूप में पेश करता है।
जैसे-जैसे चुनाव की ओर समय बढ़ रहा है, गजेंद्र सिंह रावत की बढ़ती सक्रियता ने बद्रीनाथ सीट के सियासी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।


