चमोली: प्रकृति प्रेमियों और ट्रेकर्स के लिए एक बेहद खुशखबरी है। चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध फूलों की घाटी सोमवार से पर्यटकों के दीदार के लिए आधिकारिक तौर पर खोल दिया गया है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस अनूठी घाटी के कपाट खुलते ही स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों के चेहरे भी खिल उठे हैं।
जून से अक्टूबर तक दिखेगी फूलों की बहार
प्रत्येक वर्ष की तरह, इस वर्ष भी घाटी को जून महीने के शुरुआती सप्ताह में पर्यटकों के लिए खोला गया है। यह घाटी आमतौर पर अक्टूबर के अंत तक या बर्फबारी शुरू होने तक खुली रहती है। मुख्य आकर्षण मानसून के आगमन के साथ शुरू होता है, जब पूरी घाटी में रंग-बिरंगे फूलों का कालीन बिछ जाता है। अगस्त और सितंबर के महीने में यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर होता है। इस दौरान घाटी में ब्रह्म कमल, ब्लू पोस्ता और कोबरा लिली जैसी सैकड़ों दुर्लभ प्रजातियों के फूल खिलते हैं।
रोमांच से भरा है ट्रेक मार्ग
पर्यटकों को सबसे पहले मुख्य पड़ाव गोविंदघाट से लगभग 13 किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करके बेस कैंप घांघरिया पहुंचना होता है, घांघरिया से फूलों की घाटी का मुख्य प्रवेश द्वार लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा के मद्देनजर, घाटी के अंदर केवल दिन के समय ही रहने की अनुमति होती है। सभी पर्यटकों को सूर्यास्त से पहले हर हाल में वापस बेस कैंप घांघरिया लौटना अनिवार्य है।
उद्घाटन के मौके पर उमड़ा उत्साह
कपाट खुलने के इस खास मौके पर स्थानीय प्रशासन और वन विभाग की टीम मुस्तैद दिखी। इस दौरान चौकी प्रभारी अमनदीप सिंह, वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और देश-विदेश से पहुंचे कई उत्साही पर्यटक मौजूद रहे। अधिकारियों ने पर्यटकों का स्वागत किया और उनसे घाटी की स्वच्छता और नियमों का पालन करने की अपील की।

