उत्तराखंड: सीमा पर्यटन को पंख लगाएगा ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’
चमोली।उत्तराखंड की दुर्गम और खूबसूरत नीति घाटी आगामी 31 मई और 1 जून को देश की सबसे चुनौतीपूर्ण सहनशक्ति दौड़ों में से एक, ‘नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन’ की गवाह बनने जा रही है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा भारतीय सेना के समन्वय से आयोजित किया जा रहा यह आयोजन भारत में तेजी से बढ़ते एडवेंचर टूरिज्म (साहसिक पर्यटन) के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित होगा। ‘हर काम देश के नाम’ की भावना से ओत-प्रोत यह मैराथन केवल एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि सीमा पर्यटन को बढ़ावा देने और सैन्य-नागरिक सहयोग को सुदृढ़ करने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है।
चमोली जनपद में भारत-तिब्बत सीमा के निकट स्थित नीति घाटी अपनी मनमोहक प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जानी जाती है। इस अल्ट्रा रन को देश की सबसे कठिन प्रतियोगिताओं में गिना जा रहा है, क्योंकि इसमें धावकों को तीव्र चढ़ाई, कम ऑक्सीजन स्तर और तेजी से बदलते मौसम के बीच अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का परिचय देना होगा।
उच्च हिमालयी क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस बड़े आयोजन को सुरक्षित और सुचारु बनाने में भारतीय सेना मुख्य भूमिका निभा रही है। सेना द्वारा मार्ग की सुरक्षा, टेंट और आवास व्यवस्था के साथ-साथ अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। नागरिक प्रशासन और सेना के बीच यह उत्कृष्ट समन्वय सीमावर्ती क्षेत्रों में बड़े आयोजनों के लिए एक नया मॉडल पेश कर रहा है।
भौगोलिक दूरस्थता के कारण नीति घाटी का क्षेत्र अब तक विकास और पर्यटन के नक्शे पर अपेक्षाकृत पीछे रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस आयोजन से केंद्र सरकार की ‘वाइब्रेंट बॉर्डर विलेज’ योजना को नई गति मिलेगी। आयोजन के चलते क्षेत्र में पर्यटकों और मीडिया की आवाजाही बढ़ेगी। इससे स्थानीय होम-स्टे, परिवहन, भोजन और गाइड सेवाओं से जुड़े ग्रामीणों को सीधा रोजगार मिलेगा, जिससे सीमावर्ती गांवों से होने वाले पलायन को रोकने में मदद मिलेगी।
फिलहाल, सीमांत क्षेत्र में इस दौड़ को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। रूट सर्वे और मेडिकल मॉक ड्रिल पूरी की जा चुकी हैं। स्थानीय समुदायों और प्रतिभागियों में इस साहसिक दौड़ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।


