चमोली। जिला चिकित्सालय के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट काबिलियत और मुस्तैदी का लोहा मनवाते हुए एक मासूम की जान बचाई है। खल्ला मंडल निवासी एक 6 वर्षीय बच्चे द्वारा खेल-खेल में निगला गया सिक्का डॉक्टरों ने बेहद जटिल और आपातकालीन सर्जरी के जरिए सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। इस सफल और जीवन रक्षक ऑपरेशन के बाद पीड़ित परिवार सहित क्षेत्र के लोगों ने डॉक्टरों और मेडिकल टीम को ‘देवदूत’ बताते हुए उनका आभार जताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार 29 मई को खल्ला मंडल निवासी राकेश का 6 वर्षीय पुत्र सुशांत घर में खेल रहा था। इसी दौरान उसने खेल-खेल में एक रुपये का सिक्का मुंह में डाल लिया, जो अचानक फिसलकर उसके गले में जाकर फंस गया। सिक्के के फंसते ही मासूम को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। बच्चे को तड़पता देख परिजन आनन-फानन में उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे।
बच्चे की अत्यंत गंभीर और नाजुक स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. दिग्विजय सिंह ने बिना वक्त गंवाए तुरंत ऑपरेशन करने का साहसिक निर्णय लिया। मामले की संवेदनशीलता और आपातकाल को देखते हुए एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. नेहा चौहान ने भी अनुकरणीय तत्परता दिखाई और बच्चे को तुरंत बेहोश कर ऑपरेशन थिएटर में शिफ्ट किया।
डॉक्टरों की इस संयुक्त टीम ने अपनी कुशल सूझबूझ से बेहद जटिल चिकित्सा प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम देते हुए बच्चे के गले में फंसे सिक्के को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
इस बेहद संवेदनशील सर्जरी को सफल बनाने में चिकित्सकों के साथ-साथ जिला अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ ने भी पूरी तत्परता दिखाई। ऑपरेशन के दौरान नर्सिंग अधिकारी गौतम हिंदवाल, नर्सिंग अधिकारी टीनू रानी और सफाई कर्मचारी राजा ने अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
सीमांत और विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले चमोली जिले के सरकारी अस्पताल में इस तरह की जटिल और आपातकालीन सर्जरी का सफलतापूर्वक होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि डॉ. दिग्विजय और डॉ. नेहा चौहान जैसे कुशल व संवेदनशील चिकित्सक पहाड़ के गरीब मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं, जिनकी वजह से आज एक मासूम को नया जीवन मिला है।


