चमोली।भू-बैकुंठ कहे जाने वाले भगवान श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा इस वर्ष एक नए इतिहास की ओर अग्रसर है। वर्ष 2026 की इस चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह ने पिछले सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कपाट खुलने के महज एक महीने के भीतर 5.56 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान बद्री विशाल के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया है, जो अपने आप में एक नया कीर्तिमान है।
आस्था के आगे मौसम भी बेअसर, उमड़ा जनसैलाब
कपाट खुलने के शुरुआती दिनों से ही धाम में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ना शुरू हो गया था। इस बार भीषण ठंड और ऊंचे पहाड़ी इलाकों के बदलते मौसम के बावजूद देश-विदेश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला लगातार जारी है। मंदिर परिसर और बद्रीनाथ नगर “जय बद्री विशाल” के उद्घोष से गुंजायमान है। प्रतिदिन औसतन 18,000 से 21,000 से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं, जिसके कारण दर्शनों के लिए कई किलोमीटर लंबी लाइनें देखने को मिल रही हैं।
“यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में अभूतपूर्व उत्साह है। एक महीने में 5.56 लाख का आंकड़ा पार होना इस बात का प्रमाण है कि बुनियादी ढांचे और यात्रा प्रबंधन में बड़े सुधार हुए हैं। प्रशासन और मंदिर समिति श्रद्धालुओं को सुलभ और सुरक्षित दर्शन कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है।”
— उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती बीकेटीसी
बढ़ती भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी इंतजाम कड़े कर दिए हैं। यात्रियों की भारी आमद को नियंत्रित करने के लिए टोकन प्रणाली और ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था को और सख्त किया गया है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार में भारी उछाल
बद्रीनाथ धाम में श्रद्धालुओं के इस रिकॉर्ड तोड़ आगमन से स्थानीय व्यापार जगत में खुशी की लहर है। यात्रा मार्ग पर स्थित होटलों, लॉज, होम-स्टे और ढाबा व्यवसायियों का काम पूरी तरह से परवान चढ़ चुका है। इसके साथ ही स्थानीय परिवहन और घोड़ा-खच्चर संचालकों को भी बड़े पैमाने पर रोजगार मिला है। जानकारों का मानना है कि यदि यात्रा की यही रफ्तार बनी रही, तो इस सीजन के अंत तक उत्तराखंड की तीर्थाटन अर्थव्यवस्था एक नया मील का पत्थर स्थापित करेगी।


