चमोली। मां नंदा की बड़ी जात शनिवार को नौवें दिन अपने चरम पर पहुंच गई। रामणी गांव में बंड, दशोली कुरुड़ और बधाण क्षेत्र सैंजी की नंदा डोलियों के साथ विभिन्न देवताओं की 51 से अधिक छंतोलियों के पहुंचने से आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। डोलियों और छंतोलियों के मिलन का भावुक दृश्य देखकर कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। पूरा रामणी गांव मां नंदा के जयकारों, लोकगीतों और जागरों से नंदामय हो गया है।
शनिवार को सैंजी की डोली मोली हडुग तड़कताल, विनायकधार होते हुए रात्रि प्रवास के लिए रामणी पहुंची। वहीं दशोली कुरुड़ की नंदा डोली ल्वाणी से सुंग और बौठाखाल होते हुए रामणी पहुंची। बधाण की नंदा डोली चेपड़ो से धार तल्ला पहुंची। डोलियों के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी यात्रा में शामिल हुए।
51 से अधिक छंतोलियां बनीं आकर्षण का केंद्र
रामणी के भूमियाल चौक में शाम से ही डोलियों और छंतोलियों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। बंड, फर्स्वाण फाट, क्षेत्रपाल और निजमुला घाटी से पहुंचीं 51 से अधिक छंतोलियों ने बड़ी जात की भव्यता बढ़ा दी। ग्रामीणों ने लोकगीतों, जागरों और पुष्पवर्षा के साथ देव डोलियों और छंतोलियों का स्वागत किया।
भूमियाल चौक में रातभर देवताओं के पश्वाओं ने पारंपरिक लोकनृत्य किया। देव आस्था से जुड़े इस दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे रहे। लोकनृत्य और देव परंपराओं को देखकर श्रद्धालु भावविभोर नजर आए।
बड़ी जात के दौरान देश-विदेश से नंदा भक्त विभिन्न पड़ावों पर पहुंच रहे हैं। डोलियों के मिलन के दौरान श्रद्धालु मां नंदा के जयकारे लगाते रहे और क्षेत्र की सुख-शांति व समृद्धि की कामना की।


