इजरायल से आया टॉम बना आकर्षण का केंद्र, डोली के साथ कर रहे पैदल यात्रा
गोपेश्वर। 12 वर्ष में आयोजित होने वाली मां नंदा की बड़ी जात यात्रा के पड़ावों पर आस्था और उल्लास चरम पर पहुंचने लगा है। बुधवार को बंड की नंदा डोली कम्यार, बधाण की नंदा डोली डुंगरी तथा दशोली की नंदा डोली मटई-ग्वाड़ गांव पहुंची। इस दौरान ग्रामीणों ने डोलियों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत किया।
बधाण की मां नंदा की डोली ने मायके पक्ष का अंतिम पड़ाव पार कर ससुराल क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। डोली के ससुराल क्षेत्र में पहुंचने पर ग्रामीणों में खासा उत्साह है। अब ग्रामीण मां नंदा का बहू की तरह स्वागत करने की तैयारियों में जुट गए हैं। यात्रा के अगले पड़ावों में श्रद्धालुओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
बंड की नंदा डोली नौरख, पीपलकोटी, मल्ला अगथल्ला, नंदोली मंदिर, रैतोली और नरगोली होते हुए कम्यार पहुंची। वहीं कुरुड़-दशोली की नंदा डोली सेमा से बैराशकुंड होते हुए मटई-ग्वाड़ पहुंची।
इजरायल से आए टॉम ने खींचा ध्यान
बड़ी जात यात्रा में इजरायल से पहुंचे टॉम श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वह कुरुड़ से मां नंदा की दशोली डोली के साथ लगातार पैदल यात्रा कर रहे हैं। टॉम पहाड़ की लोक संस्कृति, धार्मिक परंपराओं, ग्रामीणों के आतिथ्य और प्राकृतिक सौंदर्य से प्रभावित हैं।
टॉम ने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि दुनिया में इतनी भव्य और दिव्य पैदल धार्मिक यात्रा भी होती है। उन्होंने मां नंदा की डोली के साथ होमकुंड तक पैदल जाने की इच्छा जताई है।
सोशल मीडिया पर छा रही बड़ी जात
बड़ी जात यात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर भी पहुंच रहे हैं। दिल्ली, पंजाब, मुनस्यारी, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, नैनीताल, रुद्रप्रयाग, टिहरी, पौड़ी और देहरादून समेत विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे युवा यात्रा के पड़ावों और धार्मिक परंपराओं को कैमरे में कैद कर रहे हैं।
लोकगीत, जागर, पारंपरिक रीति-रिवाज और ग्रामीणों की आस्था से जुड़े दृश्य सोशल मीडिया के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंच रहे हैं। यात्रा में बाहरी क्षेत्रों से पहुंच रहे श्रद्धालुओं और युवाओं की मौजूदगी से ग्रामीणों में भी उत्साह का माहौल है।

