थराली (चमोली) थराली के मुख्य बाजार में गुरुवार को हुए भीषण अग्निकांड की तपिश अब सोशल मीडिया तक पहुँच गई है। ऐतिहासिक लकड़ी के भवन में लगी आग ने जहाँ एक ओर संपत्ति को राख कर दिया, वहीं दूसरी ओर थराली नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता रावत इस घटनाक्रम को लेकर नेटिजन्स (सोशल मीडिया यूजर्स) के निशाने पर आ गई हैं।
पैतृक घर बताने पर शुरू हुआ विवाद
मामला तब गरमाया जब नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता रावत ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर धू-धू कर जलते भवन का वीडियो साझा किया। उन्होंने अपनी पोस्ट में इस जलते हुए मकान को अपना पैतृक घर बताया था। पोस्ट के सार्वजनिक होते ही लोगों की प्रतिक्रियाओं का तांता लग गया और देखते ही देखते उन्हें ट्रोल किया जाने लगा।
यूजर्स ने उठाए सवाल: ‘सहयोग की जगह वीडियो क्यों?’
सोशल मीडिया पर यूजर्स जनप्रतिनिधि की इस कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। ट्रोलर्स का कहना है सक्रियता पर सवाल, एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें मौके पर राहत और बचाव कार्यों का नेतृत्व करना चाहिए था, न कि वीडियो बनाकर पोस्ट करना चाहिए था। कुछ यूजर्स ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए आरोप लगाया कि घटना की गंभीरता को समझने के बजाय इसे ‘व्यूज’ और ‘लाइक्स’ बटोरने का जरिया बनाया गया।
बचाव बनाम विरोध की बहस
जहाँ एक बड़ा वर्ग उनकी आलोचना कर रहा है, वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत क्षति से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, अधिकांश प्रतिक्रियाएं उनके विरोध में ही नजर आ रही हैं। घटना के बाद से ही विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर यह बहस तेज हो गई है कि आपदा के समय जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए।
प्रतिक्रिया का इंतजार
सोशल मीडिया पर मचे इस घमासान और तीखी बयानबाजी के बीच अभी तक नगर पंचायत अध्यक्ष सुनीता रावत की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या सफाई सामने नहीं आई है। फिलहाल, थराली अग्निकांड की चर्चा अब आग से ज्यादा इस डिजिटल विवाद को लेकर हो रही है।

