पंचायतों के सशक्तीकरण और डिजिटल बाधाओं पर हुई गंभीर चर्चा
देहरादून। उत्तराखंड प्रधान संगठन के अध्यक्ष योगिता रावत के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के पंचायती राज मंत्री से शिष्टाचार भेंट की। यह बैठक महज एक औपचारिक मुलाकात न होकर, राज्य की ग्राम पंचायतों के अस्तित्व और उनके समक्ष खड़ी गंभीर चुनौतियों पर केंद्रित रही। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि जब तक पंचायतें आत्मनिर्भर और सशक्त नहीं होंगी, तब तक ‘आदर्श उत्तराखंड’ की परिकल्पना धरातल पर नहीं उतर सकती। इस दौरान संगठन ने राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए समस्याओं को सरकार के सम्मुख प्रमुखता से रखा, योगिता रावत ने कहा विकास कार्यों के लिए समय पर बजट जारी न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अधर में लटकी है, वर्तमान महंगाई और उत्तरदायित्वों को देखते हुए ग्राम प्रधानों और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय को सम्मानजनक स्तर तक बढ़ाने की मांग की गई, पर्वतीय क्षेत्रों में खराब नेटवर्क कनेक्टिविटी के कारण ‘ऑनलाइन उपस्थिति’ और ‘डिजिटल भुगतान’ (PFMS) के क्रियान्वयन में आ रही तकनीकी बाधाओं पर चिंता व्यक्त की गई। प्रतिनिधियों ने कहा कि कनेक्टिविटी के अभाव में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने कहा पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों को प्रदत्त अधिकारों को पूर्ण रूप से धरातल पर लागू करने का आग्रह किया गया ताकि निर्णय लेने की शक्ति ग्राम स्तर पर विकेंद्रीकृत हो सके।
पंचायत मंत्री ने संगठन द्वारा उठाए गए बिंदुओं को गंभीरता से सुना। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि सरकार पंचायतों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और तकनीकी व वित्तीय बाधाओं के त्वरित निराकरण के लिए ठोस कदम उठाएगी।


