चमोली।ज्योतिर्मठ के नृसिंह मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद आदिगुरु शंकराचार्य की डोली, गाडू घड़ा (तेल कलश) और गरुड़ देवता की उत्सव मूर्ति अपने प्रथम पड़ाव पांडुकेश्वर पहुँच गई है। इस यात्रा की अगुवाई रावल अमरनाथ नंबूदरी और बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती कर रहे हैं। पांडुकेश्वर पहुँचने पर स्थानीय श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ डोली पर पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।
बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि देवडोलियों की विदाई के समय ज्योतिर्मठ के विभिन्न स्कूलों के छात्रों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। स्कूली बच्चों ने लगभग दो किलोमीटर के मार्ग तक फूलों की वर्षा कर यात्रा को विदा किया। इससे पूर्व शनिवार को तिमुंडिया वीर पूजन और ‘गरुड़ छाड़’ मेले का आयोजन कर आगामी यात्रा के निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की गई।
बदरी-केदार मंदिर समिति के उपाध्यक्ष के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 22 अप्रैल को योग बदरी पांडुकेश्वर से भगवान उद्धव जी, कुबेर जी और आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुँचेगी।
इस पावन अवसर पर नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान, धर्माधिकारी स्वयंबर सेमवाल, पालिकाध्यक्ष देवेश्वरी शाह और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विजया रावत सहित मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारी, वेदपाठी और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।


