गोपेश्वर।जिला सहकारी बैंक चमोली-रुद्रप्रयाग के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता गजेंद्र सिंह रावत ने निजमूला घाटी के नौ गांवों की लाइफलाइन माने जाने वाले बिरही-निजमूला मुख्य मोटर मार्ग पर स्थित ‘काली चट्टान’ में लगातार हो रहे भूस्खलन की गंभीर समस्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। क्षेत्र की इस ज्वलंत जन समस्या के स्थाई समाधान को लेकर उन्होंने चमोली के जिलाधिकारी को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए तत्काल प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की है।

नौ ग्राम सभाओं की आबादी प्रभावित, हर समय बना रहता है हादसे का डर
जिलाधिकारी को अवगत कराते हुए गजेंद्र सिंह रावत ने कहा कि बिरही-निजमूला मुख्य मार्ग पर ‘काली चट्टान’ के पास विगत कई वर्षों से लगातार भूस्खलन हो रहा है। इसके कारण निजमूला क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों की भारी आबादी का जिला मुख्यालय और मुख्य बाजार से संपर्क बार-बार टूट जाता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे न केवल आवाजाही ठप होती है बल्कि यहां से गुजरने वाले राहगीरों और वाहनों के ऊपर हर समय जान-माल का खतरा मंडराता रहता है।
शासन-प्रशासन तक ज्वलंत समस्याओं को पहुंचाना प्राथमिकता: गजेंद्र रावत
मामले का संज्ञान लेते हुए पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र सिंह रावत ने कहा कि जनता की बुनियादी समस्याओं और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को शासन-प्रशासन तक प्रमुखता से पहुंचाना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि काली चट्टान का यह डेंजर जोन लंबे समय से स्थानीय जनता के लिए जी का जंजाल बना हुआ है। यदि समय रहते इसका तकनीकी और स्थाई समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य में कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है।
भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और सुरक्षा कार्यों की मांग
श्री रावत ने जिलाधिकारी से मांग की है कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर तत्काल इस संवेदनशील स्थान का भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण कराया जाए और ट्रीटमेंट के कार्य शुरू किए जाएं। इसके साथ ही जब तक स्थाई समाधान नहीं हो जाता, तब तक सड़क पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं ताकि क्षेत्र की जनता और स्कूली बच्चों को सुरक्षित आवाजाही की सुविधा मिल सके। स्थानीय ग्रामीणों ने भी पूर्व अध्यक्ष की इस पहल का स्वागत करते हुए प्रशासन से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने की अपील की है।

