चमोली। राजकीय शिक्षक संघ के संविधान में विभाग द्वारा किए गए संशोधनों को लेकर शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है। जनपद कार्यकारिणी चमोली ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा द्वारा जारी नवीन संशोधन आदेशों को संगठन की लोकतांत्रिक संरचना के विरुद्ध बताते हुए इसे ‘संविधान की आत्मा पर गहरा आघात’ करार दिया है।
जिलाध्यक्ष प्रकाश सिंह चौहान ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि ब्लॉक से लेकर प्रांतीय स्तर तक की निर्वाचन प्रक्रिया में सरकार का हस्तक्षेप किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन संशोधनों के माध्यम से जानबूझकर ऐसे प्रावधान थोपे गए हैं, जिससे संगठन संस्थागत रूप से कमजोर हो जाए।
“संगठन में चुनाव की प्रक्रिया क्या होगी, यह विभाग नहीं बल्कि आम शिक्षक तय करेंगे। सबको वोट देने की आड़ में संगठन के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने की कोशिश की जा रही है।”— प्रकाश सिंह चौहान, जिलाध्यक्ष
जिला मंत्री बीरेंद्र सिंह नेगी और जिलाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 8 वर्षों से पदोन्नति बाधित है और दो वर्षों से स्थानांतरण रुके हुए हैं। शिक्षकों की अन्य लंबित मांगें भी ठंडे बस्ते में हैं।
चमोली कार्यकारिणी ने इस संबंध में प्रांतीय नेतृत्व को पत्र लिखकर अविलंब हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का स्पष्ट रुख है कि विभाग केवल उन्हीं संशोधनों को मंजूरी दे जो स्वयं शिक्षकों द्वारा प्रस्तावित किए जाएं। जनपद इकाई ने चेतावनी दी है कि यदि इन ‘दमनकारी’ संशोधनों को वापस नहीं लिया गया, तो शिक्षक आंदोलन को और तेज करेंगे।


