चमोली जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने अब आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को उक्रांद कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी के माध्यम से शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए व्यवस्था में सुधार की मांग की।
गोपेश्वर में प्राइवेट स्कूलों द्वारा दाखिले के नाम पर वसूली जा रही भारी-भरकम फीस और किताबों के सिंडिकेट के खिलाफ उक्रांद कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया है। दल के केंद्रीय महामंत्री बृजमोहन सजवाण के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी से मुलाकात कर निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।
आरोप है कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को चुनिंदा दुकानों से महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर कर रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिस पाठ्यक्रम की NCERT किताब की कीमत मात्र ₹65 है, वही SCERT के नाम पर ₹165 में बेची जा रही है। ₹100 का यह सीधा अंतर सीधे तौर पर ‘जेब कतरी’ करार दिया गया है।
जिला कार्यकारी अध्यक्ष पंकज पुरोहित ने स्कूलों की पोल खोलते हुए कहा कि कई निजी स्कूलों में न तो खेल के मैदान हैं और न ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था। यहां तक कि शौचालयों की स्थिति भी बदतर है।
जिला संगठन मंत्री अंकित पंत ने मुद्दा उठाया कि भारी फीस वसूलने के बावजूद स्कूल प्रबंधन वहां कार्यरत शिक्षकों को उचित मानदेय नहीं दे रहा है, जो कि श्रम मानकों का उल्लंघन है।
उक्रांद नेताओं का कहना है कि जब पुरानी किताबों में भी वही पाठ्यक्रम है, तो अभिभावकों को हर साल नई किताबें खरीदने के लिए विवश करना सरासर अन्याय है। कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने निजी स्कूलों की इस ‘लूट’ पर लगाम नहीं लगाई, तो दल उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा।
इस दौरान महेंद्र सिंह नेगी, कुंवर दानू, अशोक बिष्ट, धर्मेंद्र फरस्वाण और अंशुल झिंक्वाण सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे।


