चमोली।उत्तराखंड में इन दिनों आस्था और पर्यटन का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि राज्य की फिजाओं में समूचा भारत रचा-बसा नजर आ रहा है। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के बाद, शुरुआती सुस्ती को पीछे छोड़ते हुए चारधाम यात्रा अब अपने पूरे शबाब पर है। हाल ही में सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने से श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया है। देश-विदेश से आने वाले तीर्थयात्रियों की भारी आमद के कारण राज्य के पर्यटन व्यवसाय में भी जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है।
जाम के झाम से जूझते शहर
यात्रा के रफ्तार पकड़ते ही प्रवेश द्वार ऋषिकेश सहित चारधाम यात्रा मार्गों के प्रमुख शहरों में तीर्थयात्रियों और स्थानीय जनता को भारी जाम से दो-चार होना पड़ रहा है। हालात ये हैं कि ऋषिकेश-बदरीनाथ हाईवे पर जहां एक ओर श्रद्धालु कतारों में हैं, वहीं दूसरी ओर रिवर राफ्टिंग के शौकीन साहसिक पर्यटकों का भी बड़ा जमावड़ा लगा हुआ है। इसके अलावा, राज्य के प्रमुख हिल स्टेशन नैनीताल और मसूरी भी पर्यटकों से पूरी तरह पैक हो चुके हैं।
क्यों बनी देवभूमि पर्यटकों की पहली पसंद…….?
जानकारों के मुताबिक, कभी पर्यटकों का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्वी राज्यों में पिछले वर्षों के दौरान रही अशांति व आतंकवादी गतिविधियों के कारण पर्यटकों ने वहां से दूरी बनाई है। इसके चलते अब हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड देश के सबसे पसंदीदा पर्यटन केंद्र बनकर उभरे हैं।
अर्थव्यवस्था को पंख:
“चारधाम यात्रा और पर्यटन अब उत्तराखंड की आजीविका की रीढ़ बन चुके हैं। बदरीनाथ धाम राज्य से पहुंचे श्रद्धालु इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि यहां ‘अनेकता में एकता’ का अनूठा दृश्य साकार हो रहा है।”
पिछले कुछ वर्षों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्थानीय युवाओं और व्यवसायियों ने रोजगार के नए साधन विकसित किए हैं। राज्य में बड़े पैमाने पर आलीशान होटल, लॉज और स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने वाले ‘होम-स्टे’ तैयार किए गए हैं, जिससे हजारों परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल रहा है।
भविष्य की राह:
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था का भविष्य पूरी तरह से पर्यटन और तीर्थाटन पर टिका हुआ है। ऐसे में बुनियादी ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करने, ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर बनाने और पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए सुविधाओं के विस्तार की सख्त जरूरत है, ताकि देवभूमि की यह आर्थिक तरक्की स्थायी बनी रहे।


